हिंदी प्रचार सभा में आपका स्वागत है !

सन १९३५ में युगादी के पावन अवसर पर हैदराबाद राज्य के कुछ उत्साही एवं तपोनिष्ठ देशभक्तों ने भारतीय एकता को दृष्टि में रखते हुए राष्ट्रभाषा हिंदी एवं देवनागरी लिपि के प्रचार के उद्देश्य से सभा की स्थापना हुई । हिंदी भाषा के प्रचार के लिए भारत में स्थापित यह तीसरी स्वैच्छिक हिंदी सेवी संस्था है । युगादी के पावन अवसर पर २०११ में सभा ७५ वर्षो की हिंदी प्रचार प्रसार की प्रदीर्घ सेवा करते हुए अमृत पर्व में प्रवेश चुकी है ।

उद्देश्य निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ती के लिए हिंदी प्रचार सभा कार्य कर रही है ।

1. राष्ट्रभाषा हिंदी तथा देवनागरी लिपि का प्रचार और प्रसार ।
2. हिंदी के सर्वागींण विकास के लिए प्रकाशन, प्रचार एवं अनुवाद।
3. स्थानीय प्रादेशिक भाषायों को समुचित स्थान दिलाने में योग देना ।
4. भारत सरकार के काम-काज के लिए, अन्तप्रार्न्तीय उद्देश्यपूर्ति के लिए तथा भारतीय संस्कृति के विकास के लिए हिंदी को अधिक सक्षम और कार्यशील बनाना ।

इस समय सभा का कार्यक्षेत्र आन्ध्र, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक तक व्याप्त है । तीनों प्रान्तों के प्रादेशिक कार्यालय अपने अपने निजी भवन में हैं ।

"यदि आप सफलता चाहते हैं तो इसे अपना लक्ष्य ना बनाइये, सिर्फ वो करिए जो करना आपको अच्छा लगता है और जिसमे आपको विश्वास है, और खुद-बखुद आपको सफलता मिलेगी|"

"सफल होने के लिए, सफलता की इच्छा, असफलता के भय से अधिक होनी चाहिए|"